"क्रोध तब तक है, जब तक हमारा अहंकार है..."
काव्य-पंक्तियाँ (Mindful Verses)
टकराती है जब कोई नाव, हम तुरंत react कर जाते हैं,
अपने ego के शोर में, हम भीतर की शांति गँवाते हैं।
पर अगर वह नाव खाली हो, तो सारा क्रोध पिघल जाता है,
खुद को empty कर लेने पर, हर conflict सुलझ जाता है।
एक ज़ेन कथा (The Essence)
एक युवा ज़ेन भिक्षु (monk) एक छोटी सी नाव में बैठकर नदी के बीच अपना meditation कर रहा था। अचानक एक दूसरी नाव आकर उसकी नाव से ज़ोर से टकरा गई। भिक्षु का ध्यान टूट गया और उसे बहुत ज़ोर से गुस्सा आया। उसने आँखें खोलीं और दूसरी नाव वाले पर चिल्लाने (shouting) के लिए तैयार हुआ कि उसने उसे disturb कैसे किया।
लेकिन जब उसने ध्यान से देखा, तो वह नाव बिल्कुल खाली थी। वह बस नदी के natural flow में बहते हुए आकर टकरा गई थी। यह देखते ही भिक्षु का सारा anger पल भर में गायब हो गया। उसने गहराई से महसूस किया कि उसका क्रोध दूसरी नाव के कारण नहीं, बल्कि उसके अपने ego (अहंकार) के कारण था। जब सामने कोई 'व्यक्ति' नहीं था, तो क्रोध का कोई अस्तित्व ही नहीं रहा।
ज़िंदगी में इसका उपयोग (Mindful Application)
हमारी रोज़मर्रा की lifestyle में, जब भी किसी से हमारा conflict होता है, तो हम तुरंत react करते हैं। हम मान लेते हैं कि सामने वाले का इरादा हम पर कोई personal attack करना था। अगली बार जब कोई आप पर गुस्सा करे या बुरा व्यवहार करे, तो उसे एक 'खाली नाव' (empty boat) की तरह देखें। समझें कि उनका व्यवहार उनके अपने stress और unconscious patterns का परिणाम है, आपकी वजह से नहीं। जब आप चीज़ों को personally लेना बंद कर देते हैं और अपने ego को बीच से हटा देते हैं, तो आपका subconscious mind स्वतः ही शांत हो जाता है।
ZenSukti
"जहाँ शब्द सुकून बन जाएँ..."

