"विचारों से लड़ो मत, उन्हें बस बहने दो..."
काव्य-पंक्तियाँ (Mindful Verses)
बहती नदी सी है यह सोच, इसे control न कर,
जितना रोकेगा इसे, उतना ही बढ़ेगा मन का डर।
किनारे पर बैठकर बस इस flow को देखना सीख,
शांत mind से ही मिलेगी तुझे, सच्ची peace की नीव।
एक ज़ेन कथा (The Essence)
एक बार एक restless युवा शिष्य अपने ज़ेन मास्टर के पास आया और बोला, "मास्टर, मेरे दिमाग में विचारों का बहुत शोर है। मैं इन्हें कैसे रोकूँ?" मास्टर मुस्कुराए और उसे एक बहती नदी के पास ले गए। उन्होंने कहा, "जाओ, अपने हाथों से इस नदी के बहाव को रोक कर दिखाओ।" शिष्य ने बहुत कोशिश की, लेकिन पानी उसकी उंगलियों से फिसल कर और तेज़ी से बहने लगा। वह पूरी तरह exhaust होकर लौट आया।
मास्टर ने शांति से कहा, "तुम्हारे विचार भी इस नदी की तरह हैं। जब तुम उन्हें forcefully रोकने की कोशिश करते हो, तो वे और aggressive हो जाते हैं। किनारे पर बैठो, एक silent observer बनो, और उन्हें बिना किसी judgment के बस बहने दो।"
ज़िंदगी में इसका उपयोग (Mindful Application)
अपनी रोज़मर्रा की lifestyle में अपने ही विचारों से लड़ना बंद करें। जब भी overthinking या anxiety हावी होने लगे, तो खुद को उस नदी के किनारे बैठा हुआ महसूस करें। अपने विचारों को पानी की लहरों की तरह आने दें और जाने दें। उन्हें label न करें। जब आप surrender कर देते हैं और मात्र एक साक्षी (observer) बन जाते हैं, तो आपका subconscious mind अपने आप शांत हो जाता है। यही letting go सच्ची मानसिक आज़ादी है।
ZenSukti
"जहाँ शब्द सुकून बन जाएँ..."

